करें ऐसा संचय
होवे मन में घमंड
ईर्षा भरी नज़र
देवे सुख अखंड
फेसबुक इंस्टा के लाइक्स गिने
भौतिक मायावी सुख पावे
फिर भी न जाने मिथ्या [1]
लोगोंको छोडो अपना देखें
खाए पीए खेले मौज करें
देखे सोशलमिडिया अनंतकाल
भावे मनकों भावे तन को
कैसा मज़ा? क्षणभंगुर हैं ये तो! [2]
आनंद मिले बुध्दिजीवी
रसग्रहण में रखे रूची
सतही सुख से परे
काव्य शास्त्र विनोद और
कार्यफल संतुष्ट करे. [3]
भौतिक, शारीरिक, बौध्दिक, आत्मिक
सुख के होते चार स्तर
तीन सुनाए, चौथा पढ
करे त्याग लेके व्रत
मन हो तपस्वी व दृढ
सिध्दि मिले और
परमानंद परमसुखं. [4]