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फाइव स्टार स्टेशन देख
अचंबित हुआ पन्नी
सोचा बताऊं सबको
स्टेशन में लेके फोटो।
रैंप, एस्केलेटर, लिफ्ट, पार्किंग
और न जाने क्या क्या हैपनिंग !

पकड़नी थी अगली ट्रेन
डेढ़ घंटे की सवारी,
पर आयी नहीं अब तक,
धीमी पैसेंजर हमारी।
ट्रेन की राह तकते हुए
घबरा उठा मन
छूट न जाए अगली गाड़ी
हाय री मेरी उलझन।

फिर वापस मुड़े
बस स्टैंड की ओर,
खाए धक्के जो पड़े
धूप पसीना और शोर।

जाएंगे जैसे चले रस्ता
महंगा हो या सस्ता,
दिया था मौका एक
लेकिन ट्रेन आयी लेट
क्यूं न करेंगे आंदोलन
इससे न भरता पेट।

हस कर कहे दिल मेरा
अब लेले सेल्फी अपना!
वहीं पुरानी प्राइवेट बस
भीड़ भरी
पर भरोसेमंद खरी
पहुंचाई समय पर
वहीं पुराना सफर।